Saras Mela : लेजरवैली ग्राउंड में सजेगा मिनी भारत; 900 लखपति दीदियों के हुनर और जायके का दिखेगा जादू
मेले में आने वाले लोग न केवल हस्तशिल्प खरीद पाएंगे, बल्कि उन्हें बनते हुए भी देख सकेंगे। मिट्टी के बर्तन बनाना, सुई-धागे की कढ़ाई और बांस के उत्पाद बनाने का लाइव डेमो मुख्य आकर्षण होगा।

Saras Mela : साइबर सिटी गुरुग्राम एक बार फिर भारतीय संस्कृति, ग्रामीण शिल्प और नारी शक्ति के अद्भुत संगम का गवाह बनने जा रहा है। सेक्टर-29 स्थित लेजरवैली ग्राउंड में आज से राष्ट्रीय सरस आजीविका मेले का भव्य आगाज हो गया है। 26 फरवरी तक चलने वाले इस मेले में देश के विभिन्न राज्यों की करीब 900 स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी महिलाएं अपनी कला और कौशल का प्रदर्शन करेंगी।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव स्वाति शर्मा और गुरुग्राम के डीसी अजय कुमार ने सोमवार को प्रेस वार्ता कर मेले की रूपरेखा साझा की और शहरवासियों को इस सांस्कृतिक उत्सव का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया।
मेले की खास बातें:
तारीख: 10 फरवरी से 26 फरवरी 2026 तक।
समय: सुबह 11:00 बजे से रात 9:30 बजे तक।
स्थान: लेजरवैली ग्राउंड, सेक्टर-29, गुरुग्राम।
प्रवेश: बिल्कुल निःशुल्क (Free Entry)।
स्टॉल: देश के विभिन्न राज्यों की 450 से अधिक स्टॉल।
लखपति दीदियों का आत्मनिर्भर सफर
संयुक्त सचिव स्वाति शर्मा ने बताया कि ‘दीनदयाल अंत्योदय योजना’ के तहत देश की 10 करोड़ महिलाएं संगठित हो चुकी हैं। प्रधानमंत्री के 3 करोड़ लखपति दीदी बनाने के लक्ष्य के बेहद करीब पहुंचते हुए दिसंबर 2025 तक 2.9 करोड़ महिलाएं यह मुकाम हासिल कर चुकी हैं। उन्होंने खुशी जताई कि ग्रामीण महिलाओं की वित्तीय कुशलता के कारण बैंकिंग सेक्टर में उनका विश्वास बढ़ा है और एनपीए (NPA) घटकर 2% से भी कम रह गया है। इस बार मेले में केवल उत्पादों की बिक्री नहीं होगी, बल्कि महिलाओं को उद्यमी बनाने के लिए ‘नॉलेज एंड लर्निंग पवेलियन’ बनाया गया है। यहाँ प्रतिदिन कार्यशालाएं होंगी जहाँ उन्हें पैकेजिंग और ब्रांडिंग के गुर सिखाए जाएंगे। सोशल मीडिया मार्केटिंग और ई-कॉमर्स (e-Saras पोर्टल) की जानकारी दी जाएगी। ‘लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट’ सिखाया जाएगा ताकि वे अपने उत्पाद विदेशों तक भेज सकें।
मेले में आने वाले लोग न केवल हस्तशिल्प खरीद पाएंगे, बल्कि उन्हें बनते हुए भी देख सकेंगे। मिट्टी के बर्तन बनाना, सुई-धागे की कढ़ाई और बांस के उत्पाद बनाने का लाइव डेमो मुख्य आकर्षण होगा। फूड कोर्ट यहाँ राजस्थान के दाल-बाटी, पंजाब के सरसों का साग, दक्षिण भारत के डोसा और बंगाल के संदेश जैसे पारंपरिक व्यंजनों का शुद्ध स्वाद चखने को मिलेगा।
परिजनों की सुविधा के लिए मेले में एक भव्य ‘किड्स ज़ोन’ बनाया गया है। साथ ही हर शाम विभिन्न राज्यों के लोक कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी। बुजुर्गों और महिलाओं के लिए जगह-जगह विश्राम स्थल भी बनाए गए हैं।









